Sunday, 2 September 2012










उठो लाल अब आंखे खोलो 
पानी लाई हू मुह धो लो 
बीती रात  कमल दल फूले 
 उनके ऊपर भवरे झूले 
चिड्या  चहक उठी पेड़ पर 
बहने लगी हवा अति सुंदर
नभ में नयारी लाली छाई 
धरती ने प्यारी छवि पाई 
भोर  हुआ सूरज उग आया 
जल में पड़ी सुनहरी छाया 
ऐसा सुंदर समय  न खोओ 
मेरे प्यारे अब मत सोओ .

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